गणितीय ज्योतिष में खगोल विज्ञान की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती हैं।कुण्डली बनाने के कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का ज्ञान होना चाहिए। सौर प्रणाली, पृथ्वी, भूमध्यरेखा, उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध, रेखांश ,अक्षांश, ग्रीनविच, ,ग्रह मण्डल, खगोलीय ध्रुव, विषुवत वृत, क्रांतिवृत, भचक्र,भोगांश, राशिमान, सांपातिक बिन्दु, सायन और निरायन प्रणाली, लग्न सारणी, भाव सारणी और एफिमेरिज यानि आधुनिक पंचांग आदि।एक कुण्डली का निर्माण के लिए इन सब विषयों का ज्ञान होना भी आवश्यक है।
सौर प्रणाली :- हमारा सौर मंडल सूर्य के चारों ओर केंद्रित हैं। नवग्रह बुध, शुक्र,पृथ्वी, मंगल , बृहस्पति, शनि ,युरेनस, नेप्च्यून और प्लूटो और सभी तारे सूर्य के चारों ओर अंडाकार परिक्रमा पथ में चक्कर लगाते है। राहू और केतु दो छाया ग्रह हैं।खगोल शास्त्र में केवल पात बिन्दु है।ज़चन्द्रमा को अन्य ग्रहों की भांति जाना जाता हैं। चन्द्र और सूर्य के परिक्रमा -पथ के मध्य एक दूसरे को काटते वाले सुक्ष्म बिन्दुओ के रूप में गणितीय विधि से इनकी परिगणना की जाती हैं। कुछ आंतरिक ग्रह और कुछ बहरी ग्रह हैं।बुध,और शुक्र आंतरिक ग्रह हैं।मंगल,बृहस्पतिऔर शनि बहरी ग्रह हैं।
पृथ्वी :- पृथ्वी अपनी धुरी के इर्दगिर्द घूमती है और पृथ्वी :- सूर्य के चारो ओर चक्कर लगाती हैं।
पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की घूमती है।
सूर्य और तारे पूर्व से पश्चिम की ओर घूमते दिखाई देते हैं, क्योंकि पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूम रही हैपृथ्वी की धुरी उसकी परिक्रमा कक्षा के तल पर बने लम्ब से लगभग 23 डिग्री 28 मिनट के कोण पर तिरछी होकर झुकी हुई है। यदि पृथ्वी की कक्षा का तल क्षैतिज माना जाता है, तो इस पर बने लम्ब को उधर्व रेखा माना जाए तब पृथ्वी का अक्ष उस लम्ब से 23 डिग्री 28 मिनट के कोण पर तिरछा हुआ कहा जा सकता है।
राशिचक्र:- सूर्य का वार्षिक मार्ग क्रांतिवृत के नाम से जाना जाता है।क्रांतिवृत के दोनों ओर 8 अंशो में फैली यह आकाशियमण्डलीय पटिटका यानि राशिचक्र कहते है।चन्द्रमा और अन्य ग्रह इस भचक्र घुमते है।30 अंशो की की पट्टी को बारह भाग समान भागो में विभाजित किया जाता है।जो राशिचक्र की 12 राशियां हैं।ग्रहों द्वारा शासित हैं। पूरे राशिचक्र को 13अंश 20 मिनट के 27 भागों में विभाजित किया जाता है।जोकि नक्षत्र के नाम से जाने जाते है।उनके स्वामी भी हैं। समय :- प्रत्येक देश का क्षेत्र के स्थानीय औसत समय ,मानक समय और ग्रीनविच औसत समय के रूप जाना जाता है। उसे साम्पातिक काल रूप से जाना जाता हैं। पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने 23 घण्टे 56 मिनट की होती हैं।


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