आकाश मण्डल में नक्षत्र का समूह भी होता है। हमारे प्राचीन ज्योतिषाचार्यो ने उन आकृतियों का तादात्म्य पृथ्वी पर विचरण शील मनुष्य जन्तुओं के साथ करते हुए उन्हें मेष, वृष ,मिथुन,कर्क,सिंह, कन्या,,तुला,वृश्चिक, धनु, मकर ,कुम्भ और मीन राशि की संज्ञा दी। जैसे अश्विनी,भरणी,कृतिका नक्षत्र से प्रथम भाव बनता है।
प्रथम भाव मेष राशि :- काल मनुष्य की पहली राशि है। यह चक्र में 0 से 30 अंश तक आता है। इस राशि में तीन राशियों के 9 पद शामिल हैं। अश्विनी के 4 पद भरणी के और कृतिका के 1 पद हैं। काल पुरुष कुण्डली का प्रथम भाव मेष राशि है और इसका स्वामी मंगल है। मेढ़े, भेड़, बकरी जैसे चार पैरों वाले जानवर हैं। वे जहाँ मिलते हैं, वे घास के मैदानों, नदियों के किनारे, जंगल में, खेतों में जाते हैं। सर्प की बांबी, पित्त, पूर्व दिशा, हमारे शरीर का सिर, रात में बलि, क्षत्रिय वर्ण, राजा जाति, पर्वत की चोटी पर निवास, मंगल इसका स्वामी है। लाल रंग, बड़े आकार का शरीर, रजोगुण प्रधान, पृष्ठ उदय, अग्नि तत्व की प्रधानता, परिवर्तनशील राशियाँ हैं। यह पुरुष जाति, अग्नि तत्व और लाल रंग, क्षत्रिय वर्ण, रजोगुणी और पूर्व दिशा के स्वामी और सिर के ऊपरी भाग का बोध कराता है।हमारा शारीरिक गठन, होंठ, बाल, व्यक्तित्व, ज्ञान, परिवार की स्थिति कैसी है। परिवार में नाम और प्रसिद्धि, स्वाभिमान, स्वास्थ्य, चरित्र, क्रोध या मन में शांति, बचपन, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, बीमारी से पीड़ित होने पर व्यक्ति में कितना आत्मविश्वास हो सकता है। मेष राशि का स्वामी ग्रह सूर्य है।
दूसरा भाव वृषभ राशि के नाम से देखा जाता है।वृषभ राशि काल पुरुष कुंडली का दूसरा घर भी कहते हैं। सांड जैसा चित्रण किया है।शुक्र ग्रह इस घर के स्वामी हैं।खेत खलियान जिस स्थान खेती की जाती हैं। गाय और बछड़े, बैल का निवास स्थान होता हैं।दूसरा भाव धन,परिवार,आय का घर, सुंदर स्थान, गांव और शहर जिस स्थान पर व्यापार किया जाता सकता है।चार पैरों वाला पशु हैं।वृषभ राशि एक स्थिर राशि है। वाताआत्म ,सफेद रंग,लम्बा शरीर, सुन्दर और आकर्षक व्यक्तित्व, दक्षिण दिशा,रात्रि में अधिक बल, वैश्य वर्ण, सुन्दर आँखे, सुन्दर बाल, बुद्धिमान, पतली गर्दन,अपने अनुसार सिद्धांत का पालन करना , अच्छी योजना,खुश ,
तीसरा घर :- घर का प्रवेश द्वार,पराक्रम, साहस, शौर्य, छोटे, कंठ, वाकशक्ति, कान, नवम से सप्तम होने के कारण पिता की मृत्यु और पड़ोसी देशों,दूर संचार व्यवस्था और पड़ोसी के साथ हमारे सम्बंध कैसे है।नाना के भाई, माता जी का बड़ा भाई और चाचा और पिता जी के ममेरे भाई तीसरे भाव से देखे जाते है।मंगल ग्रह तीसरे भाव के कारक है।बुध तीसरे भाव के स्वामी हैं।स्मरण शक्ति, प्रतिभा, भौतिक प्रगति, पढ़ाई और लिखाई की सक्षमता,गणित विज्ञान, पत्रकार की पत्रकारिता, सम्पत्ति का बटवारा, ज्योतिष विद्या, लेखन के गुण, दूर संचार माध्यमों का ज्ञान इसी भाव से देखे जाते हैं।शरीर के अंग जैसे गला,गर्दन, भुजाएं, छाती का ऊपरी भाग,कान,स्नायु तंत्र, थाइमस ग्रन्थि,भोजननली,वासनली का ज्ञान तीसरे भाव से देखा जाता है।



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