जन्मपत्री बनाना :- जन्मपत्री किसी विशिष्ट स्थान पर किसी दिए गए समय के आकाश का नक्शा होती हैं।उस दिए गए समय में स्थान के पूर्वी क्षितिज पर उदय होने वाली भचक्र की राशि की ओर यह संकेत करती है जिसे लग्न की संज्ञा दी जाती है। इसे प्रथम भाव के नाम से जाना जाता है और उसके बाद आने वाली राशियों कमशः अन्य भावो के नाम से जानी जाती है।कुण्डली के निर्माण में दो चरण शामिल होते है:-
लग्न के भोंगाशो की गणना
लग्न के भोंगाशो की गणना
ग्रहों के भोंगाशो की गणना
एक मनुष्य की जन्मपत्री बनाने के लिए निम्नलिखित आकड़ो की आवश्यकता होती हैं।
1. जन्म का तिथि
2. जन्म का समय
3. जन्म का स्थान (रेखांश और अक्षांश)
ये सभी आवश्यक सामग्री चाहिए।
लग्न की गणना कैसे करें:- एक देश या क्षेत्र में एक जैसा समय होने के लिए मानक समय का विचार उत्पन्न हुआ।ग्रीनविच (लन्दन के निकट ) के ऊपर से पार होने वाली आग्योत्तर रेखा को शून्य रेखांश चुना गया इस लिए इस याम्योत्तर रेखा पर किसी भी क्षण का स्थानीय समय ग्रीनविच मानक समय (जी.एम.टी) कहलाता है। सम्पूर्ण विश्व का मानक समय ग्रीनविच से मापा जाता है।
भारतीय मानक समय 82°30'पूर्व और 23°11' उत्तर निर्देशानक पर आधारित हैं और जी.एम.टी से 5घण्टे 30मिनट आगे है।
ग्रहों की भोंगाशो की गणना :- भारतवर्ष में किसी भी स्थान के लिए ग्रहों की स्थितियो की गणना करने के लिए लहरी के एफिमेरिज का अनुसरण करना अच्छा है।जिससे प्रत्येक दिन के लिए सभी ग्रहों के 05:30 प्रातःकाल के भोंगाशो को दिया गया है।जन्म के समय ग्रहों की स्थिति ज्ञात करने केलिए जन्मदिन और उसके बाद के दिन के ग्रहों के भोंगाशो को नोट करे।इन दोनों के मध्य का अन्तर ग्रहों के दिन की गति को दर्शायेगा। राहु और केतु के लिए औसत स्थिति ली जाती है।सैदव 180° की दूरी पर होता है।राहु और केतु में 180°का अन्तर होता हैं।यदि ग्रह वक्री गति में है तो ग्रह द्वारा प्रातः 05:30 बजे से जन्म समय तक चली दूरी को ग्रह के प्रातः 05:30 बजे के भोंगाशो में से घटाना पड़ेगा।
अमृतसर का रेखांश 74° 53 पू
अमृतसर का अक्षांश 31° 38' उत्तर
प्रथम उदाहरण :- 20 जनवरी 2006 को 13 :30 :00 बजे दोपहर अमृतसर जातक के जन्म के समय ग्रहों की स्थितियां ज्ञात करें।
(क)जन्म का क्षेत्रीय मानक समय
(ख) जन्म का ग्रीन विच औसत समय
( ग) जन्म का भारतीय मानक समय
( घ) अमृतसर जन्म स्थानीय औसत समय
भारतीय मानक समय = 12 बजे दोपहर के बाद में जन्मे किसी जातक के जन्म का सम्पात्त काल ज्ञात कीजिए।
समाधान :- एन.सी.लाहिरी की लगन-सारिणी का प्रयोग कीजिए।
प्रथम चरण :- 20 जनवरी 2006 12 बजे दोपहर के बाद सम्पात काल = 19 घण्टे 56 मिनट 43 सेकण्ड
चरण 2. 2006 वर्ष के लिए शुद्धि @ =( + ) 0 1 मिनट 19 सेकण्ड
चरण 3. स्थान (अमृतसर ) शुद्धि = (+) 0 मिनट : 05 सेकण्ड
चरण 4. 20 जनवरी 2006 को अमृतसर में दोपहर का सम्पात काल = 19 घण्टे 58 मिनट 07 सेकण्ड
( 1से 3 तक का योग)
चरण 5 दिए गए जातक के जन्म का भारतीय मानक समय ( IST) = 13 :30 :00 स्थानीय औसत समय शुद्धि = (-) 00 :30 :28
स्थानीय औसत समय शुद्धि ( LMT) = 12 : 58 :32 =(-) 12 :00 :00
स्थानीय औसत समय शुद्धि ( LMT) = 12 : 58 :32 =(-) 12 :00 :00
चरण 6 दोपहर से समय अंतराल( T .I.) जन्म प्रातः का होने के कारण स्थानीय औसत समय को 12 में से घटाईए 12 घण्टे (-) 00 घण्टे 59 मिनट 32 सेकण्ड
चरण 7 समय -अंतराल को शुद्ध करके बढ़ाया 2 घण्टे के लिए = 00:00 :10 00 घण्टे 59 मिनट 42 सेकण्ड( बी )
चरण 8अमृतसर में दोपहर का सम्पात काल = + स्थानीय औसत समय = 19 :58 :07 + 00 :59 :42 ख 20 :57 :49 जन्म का सम्पात काल = 20 :57 :49
वर्ष 2006 के लिए आयनांश संशोधन है = 1 लग्न 06 डिग्री 08 '
= 00 :01 17
:49 12
वर्ष 2006 के लिए आयनांश संशोधन है = 1 लग्न 06 डिग्री 08 '
= 00 :01 17
:49 12
20 घण्टे 56 मिनट 00 सेकण्ड ( -) 57
अयनांश करेक्शन 2006
लग्न
लग्न
= 1 05 40
लग्न का भोगांश
ज्योतिष शास्त्र में जन्मपत्री का प्रथम भाव कहा जाता है।अतः विभाजन वाला यह बिन्दु बहुत महत्वपूर्ण होता हैं क्योंकि यह जन्मपत्री का आरम्भिक बिन्दु माना जाता है।पृथ्वी अपनी धुरी का लगभग 24 घण्टे में पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इस घूमने की गति के कारण ही सम्पूर्ण आकाश (भचक्र) ऐसा लगता है कि जैसे वह क्षितिज के नीचे से क्रमशः निकलता जा रहा हो।पूर्वी क्षितिज में उदयमान राशि को लग्न कहते हैं। एक दिन में 24 घण्टे होते हैं।जैसे -जैसे बारह राशियो के विभाजन की समान नही होती है।प्रत्येक दो घण्टे की अवधि के बाद एक उदय लग्न होता हैं। लग्नो के नाम वही होते हैं जो कि किसी भी दिए गए समय मे उदयीमान राशि के होंगे।
ज्योतिष शास्त्र में जन्मपत्री का प्रथम भाव कहा जाता है।अतः विभाजन वाला यह बिन्दु बहुत महत्वपूर्ण होता हैं क्योंकि यह जन्मपत्री का आरम्भिक बिन्दु माना जाता है।पृथ्वी अपनी धुरी का लगभग 24 घण्टे में पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है। इस घूमने की गति के कारण ही सम्पूर्ण आकाश (भचक्र) ऐसा लगता है कि जैसे वह क्षितिज के नीचे से क्रमशः निकलता जा रहा हो।पूर्वी क्षितिज में उदयमान राशि को लग्न कहते हैं। एक दिन में 24 घण्टे होते हैं।जैसे -जैसे बारह राशियो के विभाजन की समान नही होती है।प्रत्येक दो घण्टे की अवधि के बाद एक उदय लग्न होता हैं। लग्नो के नाम वही होते हैं जो कि किसी भी दिए गए समय मे उदयीमान राशि के होंगे।

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