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बारह राशियों रंग रूप और निवास स्थान।

 बारह राशियों रंग रूप और निवास स्थान।    1.    मेष राशि:- मेंढा, भेड़ या बकरी के चतुष्पाद पशुओं, घास के मैदान में, जंगलों, नहर, झीलो में स्थित रहता है l उसके बाद सांप बांबियों, खनिजों के स्थान पर रहते हैं l    2. वृषभ राशि :- सांड का चिन्ह है l खेत, खलियान, कृषि की भूमि, गौशालाएं, वन, पहाड़ों पर, वे स्थान जो गांव, कस्बा, शहर, सुन्दर स्थल हैं और यात्रियों के मनमोहक स्थानों, जिस स्थानों व्यापार होता हो l    3.       मिथुन राशि: -  एक स्त्री और एक पुरुष का हाथ में वीणा पकड़े हुए प्रतीक चिन्ह होता हैं l  पूजा उपासना का स्थल, जुआ खेलने का स्थान, संगीत शाला, विलासिता भवन, नृत्य अभिनय कक्ष, सोफा सेट, विश्राम गृह, बाग, बगीचे, गांव और शहरों में निवास करने वाले है l         4.कर्क राशि:-  काल पुरुष की चतुर्थ राशि कर्क राशि का प्रतीक चिन्ह केकड़ा है l जल स्थान, पानी के निकट निवास, तालाबों में, झील, नदी में निवास करने वाले है l          5.  सिंह राशि:- सिंह राशि का ...
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जन्मकुंडली के बारह भाव और बारह राशियां है।

                                                                         आकाश मण्डल में नक्षत्र का समूह भी होता है। हमारे प्राचीन ज्योतिषाचार्यो ने उन आकृतियों का तादात्म्य पृथ्वी पर विचरण शील मनुष्य जन्तुओं के साथ करते हुए उन्हें मेष, वृष ,मिथुन,कर्क,सिंह, कन्या,,तुला,वृश्चिक, धनु, मकर ,कुम्भ और मीन राशि की संज्ञा दी। जैसे अश्विनी,भरणी,कृतिका नक्षत्र से प्रथम भाव बनता है। ज्योतिष में काल पुरुष कुंडली के बारह भावों पर आधारित होता है। उन राशियों के स्वामी नौ ग्रह हैं। 27 नक्षत्रों और बारह घरों का प्रतिनिधित्व करता है। उनके द्वारा बनाए गए अंतर्संबंधों को दर्शाता है। घरों के कारक और उन पर दृष्टि का प्रभाव होता है। ग्रह अपनी उच्च राशि में स्थित है या अपनी नीच राशि में स्थित है।     प्रथम भाव मेष राशि    :-    काल मनुष्य की पहली राशि है। यह चक्र में 0 से 30 अंश तक आत...

ज्योतिष और गणितीय ज्योतिष

गणितीय ज्योतिष में खगोल विज्ञान की  भी महत्वपूर्ण  भूमिका होती हैं।कुण्डली बनाने के कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का ज्ञान होना चाहिए। सौर प्रणाली, पृथ्वी, भूमध्यरेखा, उत्तरी गोलार्ध और दक्षिणी गोलार्ध, रेखांश ,अक्षांश,  ग्रीनविच, ,ग्रह मण्डल, खगोलीय ध्रुव, विषुवत वृत, क्रांतिवृत, भचक्र,भोगांश, राशिमान, सांपातिक बिन्दु, सायन और निरायन प्रणाली, लग्न सारणी, भाव सारणी और एफिमेरिज यानि आधुनिक पंचांग आदि।एक कुण्डली का निर्माण के लिए इन सब विषयों का ज्ञान होना  भी आवश्यक है।                                                                                   सौर प्रणाली :- हमारा सौर मंडल सूर्य के चारों ओर केंद्रित हैं। नवग्रह बुध, शुक्र,पृथ्वी, मंगल , बृहस्पति, शनि ,युरेनस, नेप्च्यून और प्लूटो और सभी तारे सूर्य के चारों ओर अंडाकार परिक्रमा पथ में चक्कर लगाते है। राहू ...

जन्मपत्री बनाना

जन्मपत्री बनाना :- जन्मपत्री किसी विशिष्ट स्थान पर किसी दिए गए समय के आकाश का नक्शा होती हैं।उस दिए गए समय में स्थान के पूर्वी क्षितिज पर उदय होने वाली भचक्र की राशि की ओर यह संकेत करती है जिसे लग्न की संज्ञा दी जाती है। इसे प्रथम भाव के नाम से जाना जाता है और उसके बाद आने वाली राशियों कमशः अन्य भावो के नाम से जानी जाती है।कुण्डली के निर्माण में दो चरण शामिल होते है:- लग्न के भोंगाशो की गणना ग्रहों के भोंगाशो की गणना एक मनुष्य की जन्मपत्री बनाने के लिए निम्नलिखित आकड़ो की आवश्यकता होती हैं।   1. जन्म का तिथि    2. जन्म का समय 3. जन्म का स्थान   (रेखांश और अक्षांश) ये सभी आवश्यक सामग्री चाहिए। लग्न की गणना कैसे करें:-  एक देश या क्षेत्र में एक जैसा  समय होने के लिए मानक समय का विचार उत्पन्न हुआ।ग्रीनविच (लन्दन के निकट ) के ऊपर से पार होने वाली आग्योत्तर रेखा को शून्य रेखांश चुना गया इस लिए इस याम्योत्तर रेखा पर किसी भी क्षण का स्थानीय समय ग्रीनविच मानक समय (जी.एम.टी) कहलाता है। सम्पूर्ण विश्व का मानक समय ग्रीनविच से मापा जाता है। ...